Philosophy

  • Why Mia left Seb?

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    La La Land was not any different from the mundane land and times we live in! The cliched theme of love lilted with melodious music and weaved with lyrical dialogues bestowed…

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  • पुराना इंसान

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    जब कभी उकता जाना खुद से  तो पढ़ी हुयी किताब बंद कर देना जब कभी ऊब जाना सब से जिनसे मिल चुके उनसे न मिलना जब कभी थक जाना चलने…

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  • कौवे के प्रश्न

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    सूखी डाल पर बैठा कौवादेख रहा खिड़की के पार,एक मेज पर सोती कलमेंजिनमें छुपे भाव अपार। कौवे ने ऊंची तान में पूछाबना सकते क्या मेरा आकार?सुंदर सा दिखता हूँ क्या…

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  • हाथ की रेखायें

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    कहीं कुछ तो लिखा होगा उनके भी लियेजिन्होंने की हैं कोशिशेंऔर मिला जिन्हें कुछ भी नहीं;अगर नहीं लिखा कुछतो लिख लें कुछ वो भीअपनी उँगलियों से,हर हाथ की रेखायेंमेहनत से…

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  • नया तांडव

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    अब आम और आदमी पहले जैसे नहीं पकतेक्योंकि नहीं पड़ती गर्मीजैसे पड़ा करती थी बचपन मेंअब या तो कच्ची रहती हैं बौरया फिर “आत्मा” ही जल जाती है। आज फिर…

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  • काश!

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    काश! सुलझ जाती कुछ उलझनें;उंगलियों में घूमता हुआ वो धागातुमने उलझाने के लिये तो न लपेटा होगा,गोरी उंगलियों पर लिपटीकाले धागे की कई परतेंअंगूठी है उस रिश्ते कीजिसे न किसी…

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  • On my own

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    Standing on your own feet and tasting the fruits of your labour is the most cherished aspiration of human life. It would surely be an ecstatic moment when the emptiness…

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  • गर्म चट्टान

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    यूँ  तप रहा है मेरा बिस्तर  जैसे रेगिस्तान में तपती हुयी  एक गर्म चट्टान, इस निर्जन जीवन में  नहीं कोई और सम्बल।    मेरे पीठ के फफोले  अब फूटते भी…

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  • बदलाव

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    कितना बदलूँ खुद को मैंकि वैसा हो जाऊँजैसा मैं सच में हूँ,ये शिकायत के कपड़ेअब पुराने हो गये हैंये आँसुओं की दीवारें खोखली हो चुकी हैंबहुत दिन हो गएहोठों को…

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  • नयी पत्तियाँ

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    मेरी मेज पर रखे शीशे के गमले मेंजो कि आधा भरा है पानी सेखड़ा है एक छोटा सा पौधाघिरा कुछ रंगीन गोलियों सेमेरी बेरंग सी ज़िन्दगी मेंबस ये ही रंग…

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