Philosophy
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माँ की बातें
· कविताएँमाँ ने बचपन में जो ककहरा सिखाया था वो अभी तक याद है वहाँ से लेकर अब तक और कितना कुछ भूल गया, तब शायद बिना बहस किये बिना ज्ञान…
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बदल जाओ तुम भी
· कविताएँसब बदलता है दुनिया में तुमको भी पता है अब जीना हो अगर तो बदल जाओ तुम भी सब उसूलों की आजमाइश होगी तुम पर ही प्यार करना हो अगर…
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ज़रूरी नहीं है
· कविताएँमैं अब चुप हूँ बस तेरे लिये ऐ जाँ यादें हैं काफी ज़ुबाँ ज़रूरी नहीं है न वो बोलते हैं न हम बोलते हैं समझना न ये कि बात होती…
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वो आज याद आ रहे हैं
· कविताएँन मिले जिनसे हम न छुआ है कभी भी रूठे दिलबर मेरे वो आज याद आ रहे हैं न गिला है उन्हें है न शिकवा हमें भी दस्तूर ज़माने के…
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आख़िर आप चाहते क्या हैं?
· कविताएँबहुत अहंकारी हैं आप! आपके सोचने से आपका प्रेम सबसे सच्चा नहीं हो जाता दुःखी होने पर सिर्फ़ आपके ही आँसू नहीं बहते, प्रेम बस शब्दों और भावनाओं से नहीं…
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प्रेम-सूर्य
· कविताएँमेरे कमरे में धुंध भर गयी है प्रेम-सूर्य कहाँ हो तुम? अब और न छिपो मुझसे मुझे कुछ दिखाई नहीं देता, मैं कब तक चलूँगा अंदाज़े से इन पथरीली राहों…
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चलो सब अदालतें बंद कर देते हैं!
· कविताएँअलसाती दिसंबरी ठंडी में जब कोहरा धूं-धूं उड़ता है रातें लम्बी होती हैं सूरज जब देर से चलता है उन्हीं सुबहों में जब मखमली कंबलों में पैर हमारे सिकुड़ते हैं…