कविताएँ

कविताएँ और ग़ज़लें। Poems and ghazals in Hindi.

  • दुआ

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    मैं जब भी गिरता ख़ुद ही उठ जाता थामाँ ने माँगी थीं बेपनाह दुआयें मेरे लिये एक दौर बड़ी कशमकश थी ज़िन्दगी मेंजब आये सुकून साथ लाये तुम मेरे लिये…

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  • असन्तोष

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    उम्र के साथफैलता जाता है बरगदताड़ ऊँचा होता जाता है;शहर में दो बड़े आदमी हैंएक की जड़ों का अंत नहींदूसरा अकेले हवा खाता है;मिडल क्लास हो किंकर्तव्यविमूढ़लटका है त्रिशंकु साइन…

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  • अनसुनी पुकार

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    क्यों तुम मुझसे रूठे रामबाधायें जीवन में अविराम,किस विधि स्तुति करूँ तुम्हारीजीवन मेरा भी बने अभिराम। शबरी को अपनाया तुमनेबाली को भी तारा है,मारुति के संग रण मेंतुमने रावण को…

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  • बड़प्पन

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    जो बैठे हैं शिखरों परनहीं सबके पाँव में छाले हैं,ऊपर चमक रही है कायापर अन्दर दिल बड़े काले हैं। हर सफल नहीं है समग्र पूज्यसब नहीं सच्चे साधन वाले हैं,“मैं”…

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  • तेरी मोहब्बत

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    जिस साँस में नहीं तुम उस पर तोहमत है, हर ज़र्रा रोशन जिस से वो तेरी मोहब्बत है। बड़ा पाक है तेरे साये का हसीन असर, हर रंग-ए-ज़िंदगी बस तेरी…

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  • अकेली मौत

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    पत्तियों का सूखना,बूंदों का गिरना,संबंधों का टूटना-ये निशान हैं किश्तों में होने वाली मौत के;कोई अचानक ही नहीं मरता,कोई अकेले नहीं मरता। सपनों का टूटनाआवाज़ का रूठनाबर्तनों का फूटना-ये निशान…

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  • प्रेम निवेदन

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    एक निवेदन तुमसे हैकरना तुम स्वीकार प्रिये,प्रेम रत्न से सदैव तुमकरना अपना श्रृंगार प्रिये। यह जीवन का सूर्य प्रखरशीतल हो तुम छाँव प्रिये,मैं पृथ्वी सा घूमूँ नित्यधुरी तुम मेरा तुम…

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  • प्रेमी मन

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    ये मौन प्रेम की प्रखर कल्पनानहीं यथार्थ में सुखदायी,प्रेम फलता है स्निग्ध स्नेह सेनहीं इसने आदर्शों की सत्ता चाही। नैतिकता बसती है स्वत्व मेंहै उसमें भी सहज अहं भाव,प्रेम निर्झर…

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  • दबे हुये बीज

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    हर एक मनुष्य किसान हैवो बोता है कई बीजइनकी आशा में-लहलहाती फ़सल,फल लदे पेड़,सुंदर फूलों के गुच्छे,और कुछ नहीं तोसुकून देने वाला हरापन। आशा असीमित नशा हैक्षितिज पर पहुँच कर…

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  • माता-पिता की आराधना

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    करो माता-पिता की आराधना जीवन जिनका तुम पर समर्पित कर्म-श्रेष्ठ साधक बन तुम करो सार्थक उनकी साधना। शैशव की शैया पर जब हम उलट-पलट इठलाते थे, दौड़ पड़ते थे माँ…

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