माता-पिता की आराधना

– अशान्त ·

– Ashant ·

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करो माता-पिता की आराधना

जीवन जिनका तुम पर समर्पित

कर्म-श्रेष्ठ साधक बन तुम

करो सार्थक उनकी साधना।

शैशव की शैया पर जब हम

उलट-पलट इठलाते थे,

दौड़ पड़ते थे माँ के हाथ

जब-जब हम गिर जाते थे,

याद करो वो दिन जब तुमने

पहली बोली बोली थी,

काला टीका तुम्हें लगा कर

माँ खुशी से थोड़ा रो ली थी।

उंगली पकड़ कर जीवन पथ पर

तुम्हें चलना जो सिखलाता है,

उबड़-खाबड़ सड़कों पर भी वो

तुम्हारा साथ निभाता है,

माँ की ममता देखे हर कोई

पिता कहीं पीछे छूट जाता है,

माँ सब कुछ कह देती है

पिता चुपके से प्यार दिखाता है।

माता-पिता कुम्हार के दो हाथ

जो हमको हर क्षण कुछ सिखलाते हैं,

गीली मिट्टी जैसे हम बच्चों के

जीवन को सुंदर आकार दे जाते हैं,

जीवन के हर एक क्रम में जो

हम संग हैं यत्न जो कर्मशील,

वो जो है देव-तुल्य माता-पिता

तुम करो उनकी आराधना।

जीवन जिनका तुम पर समर्पित

कर्म-श्रेष्ठ साधक बन तुम

करो सार्थक उनकी साधना

करो माता-पिता की आराधना।

-अशान्त

– अशान्त

– Ashant

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