Philosophy
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सुबह नये साल की
· कविताएँकशमकश भरी है सुबह इस नये साल की ज़िन्दा है सब यादें हर बीते हुये साल की इत्तेफ़ाक़न कोई सिक्का मिल जाये सड़क पर होती नहीं ताईद वो हयात-ए-मालामाल की…
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वो अकेला उड़ गया है
· कविताएँवो परिंदा जो था मेरा आज देखो उड़ गया है जितने अरमाँ थे हमारे साथ लेके उड़ गया है, बेकरारी है अगर उसका बोलो क्या करें साथ देता जो हमारा…