Philosophy

  • तस्वीरें

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    तस्वीरें स्क्रीन पर नहीं काग़ज़ पर अच्छी लगती हैं, उभर आते हैं जज़्बात काग़ज़ की ख़ुशबू के साथ, जी सा जाता है वो पल जब कोई मुस्कुराया था और पहुँच…

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  • पैरहन

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    मेरी किताब के पहले पन्ने पर लिखे लफ़्ज़मेरे नहीं तुम्हारे हैंआज कल कलम की नोंकमुड़ जाती है उधरजिधर तुम्हारी आँखें मुड़ जाती हैं;कई बरसों से मुझे नींद नहीं आयी हैजो…

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  • तुम जैसा जहान में नहीं

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    कभी कोई शक़ हो ख़ुद पर ले लेना मेरी नज़र तुम उधार, यक़ीन हो शायद तुम्हें उस पल तुम जैसा हुस्न जहान में नहीं। कभी कोई गिला हो ख़ुद पर…

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  • मेरा चाँद

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    मेरा चाँद आसमान में नहीं मेरे दिल में निकलता है, मेरा चाँद सुबह शाम से परे हर पल मेरे दिल में पिघलता है, मेरा चाँद जब आता है आँखों में…

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  • डूबता सूरज

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    ऐ डूबते सूरज! क्या निगल सकते हो तुम? मुझे और मेरे संतापों को उस प्रकाश की तरह जो तुम्हारे डूबते ही चला जायेगा पृथ्वी से, जीवन से भी। ऐ डूबते…

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  • हृदय में मेरे आओ राम

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    पास मेरे अब आओ राम हृदय में रावण बैठा है हृदय में मेरे आओ राम काम करें कैसे निष्काम हाथों में रावण रहता है हाथ में मेरे आओ राम प्रेम…

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  • सूखता पौधा

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    एक डंठल पीली तोड़ करमिटाये सूखने के निशानपीले हो गये तुम परनहीं पहुँचोगे श्मशान,तिनका जब तक रहेगा एक भी हराभाग्य जीवन का रहेगा सदा भरा। हरे हो तुम तो हरी…

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  • तुम साथ होते हो मेरे

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    कब साथ होते हैं दो लोग?जब होते हैं हाथों में हाथया होती है बातों में बात? तुम साथ होते हो मेरेजब सोच लेती हूँ मैं उस पल कोजब मैंने तुम्हें…

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  • सत्य

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    जाना ही सत्य है;जन्म से लेकर प्रेम तकलोग आते हैंमात्र जाने के लिये। फूल सूख जाता है खिल करपानी बह जाता है मिल करऔर समय के साथलिखा हुआ सब मिट…

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  • स्वप्न-हन्ता

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    जो लौट गया घर अपनेलेकर टूटे सपनों की गाँठक्या लौटेगा उसका यौवनहफ़्ते में दिन जिसके आठ। वो सूखे होंठ पथराई आँखेंबोले चुप चुप में ही हर बातकब तक सुबह की…

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