कभी कोई शक़ हो ख़ुद पर
ले लेना मेरी नज़र तुम उधार,
यक़ीन हो शायद तुम्हें उस पल
तुम जैसा हुस्न जहान में नहीं।
कभी कोई गिला हो ख़ुद पर
ले लेना मेरी वफ़ा तुम उधार,
यक़ीन हो शायद तुम्हें उस पल
तुम जैसा शख़्स जहान में नहीं।
कभी कोई ग़म हो ख़ुद पर
ले लेना मेरी हँसी तुम उधार,
यक़ीन हो शायद तुम्हें उस पल
तुम जैसी मुस्कान जहान में नहीं।
कभी कोई मसरूफ़ियत हो तुम पर
ले लेना मेरी फ़ुर्सत तुम उधार,
यक़ीन हो शायद तुम्हें उस पल
तुम जैसा आज़ाद जहान में नहीं।
कभी कोई परेशानी हो ख़ुद पर
ले लेना मेरा साथ तुम उधार,
यक़ीन हो शायद तुम्हें उस पल
तुम जैसा साथी जहान में नहीं।
– अशान्त

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