Philosophy
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आठ गुना आठ
· कविताएँआठ गुना आठ का कमरा, कोने में रखी मेज़ जिस पर फैली है सालों की मेहनत जिसका न तो कोई रंग है न कोई आकार और न ही कोई अस्तित्व;…
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प्रशस्त-प्रेम
· कविताएँप्रिय मित्र ऋचा और अंकित की विवाह की चौथी वर्षगाँठ के अवसर पर एक छोटा सा प्रयास- कुछ यूँ सुंदर है प्यार तुम्हारा जैसे बोगनवेलिया के रंग-बिरंगे फूल कुछ यूँ…