Philosophy

  • अकेलापन

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    एक खाली मेजतीन खाली कुर्सियाँएक अकेला अकेलापन-दो कुर्सियाँ ही खाली थींपिछली बार कहा था तुमने नहीं होगाकभी कोई अकेला,पर देखो न ऐसा क्यों हैपिछली बारजिसने उलझाये थे तुम्हारे बालआज उसने…

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  • छुटपन

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    छुटपन में सुंदर लगने वाली हर चीज़खो देती है पढ़-लिख करअपनी सुंदरता और अपने आप को। छत की सुलाईचोट की रुलाईनानी की बातटूटा हुआ दाँतबेफ़िक्री का हाथबिन बिजली की रातबचपन…

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  • ओवरब्रिज

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    बड़े शहर की सड़कों पररेलवे स्टेशन परहर भीड़ वाली जगह परओवरब्रिज होता है। नये-पुराने विचारधुंधली विचारधारायेंछोटे-बड़े लोगचल कर उसके कंधों पर इस पार से उस पार हो जाते हैं;काल की…

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  • दो अधूरे लोग

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    मैं सब कुछ लिख दूँगीतुम सब कुछ पढ़ लोगे,मैं सब कुछ कह दूँगीतुम सब कुछ सुन लोगे,दो अधूरे लोगों में फिरबचा क्या रह जायेगा? क्यों कहते नहीं तुम कुछलिखते क्यों…

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  • रद्दी

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    बहुत दिनों बाद आज आँधी आयी थी-  चेहरे पर, आँखों के कोरों में, बालों में, खिसखिसाते दाँतों  में, धूल जम गयी है; पर  सबसे बुरा ये हुआ  सालों की सहेजी…

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  • जब तुम मिल जाती हो

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    तुम नसीम सी हो मन महक जाता है  जब तुम मिल जाती हो।  तुम दुआ सी हो  बला टल जाती है  जब तुम मिल जाती हो।  तुम धागे सी होभावों…

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  • मैं तुमसे क्या मांग सकता हूँ?

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    मैं तुमसे क्या मांग सकता हूँ?क्या माँगना स्वाभिमान है?एक मध्य-वर्गीय शोषित हूँ मैंमेरी हड्डियाँ नहीं गली हैंमेरे पीठ-पेट नहीं हैं एकमेरा कमरा किताबों सेफ़ोन कई छूटी कालों सेघर आशावान घरवालों…

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  • तीन डंठलों वाला पौधा

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    तुम्हारे दिये पौधे में  बस तीन डंठलें बची हैं,  सब दिखता है  शीशे के गमले के आर-पार  इसलिये उस में नहीं जमा होने दी  कभी कोई गन्दगी; दावा तो नहीं…

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  • मासूम

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    मुख़ालफ़त हमसे करते इश्क़ तो मासूम था सज़ा ज़ुबाँ को देते दिल तो बेचारा मासूम था तुम्हारे तग़ाफ़ुल से मर गया जो जीते जी कह दो तुम ही वो शख़्स…

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  • जीवन एक विडंबना है

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    जीवन एक विडम्बना है-सफ़ेद सुन्दर है शांत है बाहरबूढ़ा है,बदसूरत है बाल पर;लाल क्रान्ति है प्रेम हैशरीर से निकले तो हिंसा है;काला सोखता है सब प्रकाशअदालत में काले की ही…

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