जीवन एक विडम्बना है-
सफ़ेद सुन्दर है शांत है बाहर
बूढ़ा है,बदसूरत है बाल पर;
लाल क्रान्ति है प्रेम है
शरीर से निकले तो हिंसा है;
काला सोखता है सब प्रकाश
अदालत में काले की ही सत्ता है;
जीवन जब तक हाँ में हाँ है
तब तक जीवन है
प्रश्न और विरोध के आते ही
जीवन एक विडंबना है।
सफ़ेद सुन्दर है शांत है बाहर
बूढ़ा है,बदसूरत है बाल पर;
लाल क्रान्ति है प्रेम है
शरीर से निकले तो हिंसा है;
काला सोखता है सब प्रकाश
अदालत में काले की ही सत्ता है;
जीवन जब तक हाँ में हाँ है
तब तक जीवन है
प्रश्न और विरोध के आते ही
जीवन एक विडंबना है।
– प्रशान्त

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