Philosophy
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मैं स्वतन्त्र हूँ
· कविताएँजिस दिन, बिना झूठ बोले बिना बात बनाये बिना भेष बदले बिना कुछ गलत कहे बिना कोई और बने मैं सच बोल सकूँगा मैं मानूँगा कि, मैं स्वतन्त्र हूँ। …
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कटते रहोगे तुम
· कविताएँजब अपने ही बदल जायें तो क्या कर लोगे तुमचलने लगेगी जब ज़मीन कितना ठहर लोगे तुम रिश्ते, इश्क़,दोस्ती, सब जज़्बा-ए-दिल हैंदिल ही बदल जायें तो क्या कर लोगे तुम कम थे…
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असमय मृत्यु
· कविताएँमेरा जो कुछ भी मुझ में थाहो गयी उसकीआज असमय मृत्यु। ये उसी दिन तय हो गया थाजब पहली बार मैंनेकुछ अलग करने को सोचा था। मेरे सपने बन गये…
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पैरों के निशान
· कविताएँपड़ते नहीं अब कहीं मेरे पैरों के निशानमेरी रूह मुझसे कब की जुदा हो चुकी है जो जलती थी मुझ में मैं चलता था जिस सेवो हसरत भी मुझसे विदा…