Philosophy
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कुछ पता नहीं
· कविताएँमाँ वाली शर्ट की उधड़ी सिलनजब सिली थी तुमने पहली बारना समझ आया थातुम पास आयी थी यामाँ हुयी थी दूरमैंने आज फिर वही शर्ट पहनी हैमाँ आज भी नाराज़…
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मैं पुराना ही अच्छा था शायद
· कविताएँमैं पुराना ही अच्छा था शायदतब कोई भी बात मुझेपरेशान नहीं करती थी,और अब,सफ़ेद शर्ट पर थोड़ा सा छींटाकर देता है परेशान मुझे। मैं पुराना ही अच्छा था शायदतब न कोई…
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The Last Man
· EssaysOh Man!Why are you standing last?Asked the God I am meant to be hereMy Lord! Why do you say so?Why don’t you put a foot forward?What forbids you to reach…
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अब भी तेरे इंतज़ार में बैठे हैं
· कविताएँजो धड़क उठे वो दिल ही क्याहम तेरी आरज़ू में बेहाल बैठे हैंसुन्न सब अब कुछ लगता नहींअब भी तेरे इंतज़ार में बैठे हैं परस्तिश तुम्हारी नूरी निगाहों कीमोहब्बत थी मुरव्वत नहींचुप…
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बहुत दिनों से
· कविताएँबहुत दिनों सेमैंने देखा नहीं तुमकोऔर ना हीसुनी तुम्हारी आवाज़पर,एक छाया धुंधली सीहै रेखांकित कहीं मन मेंजिसमें दिख तो नहीं रहीपर खुल के खिलखिला रही हो तुम। नहीं है उस…
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महल की खिड़की
· कविताएँविकास एवं प्रगति सदैव प्रसन्नता का स्त्रोत हों,यह आवश्यक नहीं है। इस कविता में सोने की खिड़की पर बैठी चिड़िया के माध्यम से भौतिक रूप से सम्पूर्ण मनुष्य की आत्मिक अभिलाषा…