Philosophy

  • मन का जहाज

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    गिराया वक़्त ने बहुत लेकिनबेशर्म निकला मैं भी बहुतइतना किअब कोई चोट दर्द नहीं देतीअब कोई गाली खीझ नहीं देतीअब कोई हार ग़म नहीं देतीअब कोई बात कोई रंग नहीं…

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  • संगम

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    प्रस्तुत लघु-कथा एक कल्पना मात्र है। किसी भी जीवित या मृत व्यक्ति या किसी वस्तु से किसी भी प्रकार की समानता, मात्र एक संयोग है। लेखक का आशय किसी भी विचारधारा या मनुष्य…

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  • फिर भी माँ मुझसे बात करती है

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    मैं कितना बुरा हूँफिर भी माँ मुझसे बात करती है, जिनके कारण लड़ा था मैं तुमसेअपना असली रंग दिखा गएपर तुम आज भी रंगी हुई होममता के अमिट रंग में,आज…

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  • मेरा जीवन तो पहले से निर्धारित था

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    मेरा जीवन तो पहले से निर्धारित थामैंने ही छेड़-छाड़ कीबाधित कर अविरल प्रवाहमध्यम वर्गी विचारों काजो थे उद्भवित मेरे मध्यम अस्तित्व सेचेष्टा कीकरने को आलिंगन नवीनसमाहित थे अपरोक्ष जिनमेंकुछ सुविचार…

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  • सख्त दरवाज़े

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    सख्त दरवाज़े थे मेरे भी घर के पर वक़्त के साथ खुल गए वो जो कालिख़ लगी है कुण्डी पे और जो दरारे हैं पल्लों पे असर है उस आग…

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  • अनलिखा ख़त

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    कल आधी रात पढ़ा वो ख़तजो तुमने कभी लिखा ही नहींआंसुओं की स्याही भलाक्या कोई रंग लाती है! फिर भीआज सुबह से मन भारी हैलगता हैज़माने भर की धुंध मेरे…

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  • इलाहाबाद

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    तेरे पास था तो इतनी कद्र ना थी आज जाना तू सिर्फ शहर नहीं कुछ और  इमारतों पर चढ़ ये मुल्क  शायद ऊंचा हो जाए पर इलाहाबाद! तेरी रूह सिरमौर…

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  • घाव अभी ताज़ा है

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    कल ही की तो बात है मैं गिरा था अपने घर के आँगन में बस हलकी सी खरोंच ने माँ को रुला दिया था उस दिन दिल्ली में घायलों को…

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  • मैं जिंदा हूँ

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    सोते हुए बीच रात आज आँख खुल गई माथे पर था पसीना सांसें भी कुछ तेज़ थीं  भागती धड़कन से एहसास हुआ मैं जिंदा हूँ एक सपने में अभी-अभी देखी…

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  • Personal ambitions in Group activities

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    Human being is a social animal evolving continuously. Apart from various Darwinian factors of evolution, there are some abstract occurrences of daily life that lead to gradual development of human beings. Everyone…

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