Philosophy
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मैं शांत हूँ आज
· कविताएँमैं शांत हूँ आज पर थका नहीं हूँ मेरा बिस्तर पर लेटना मेरी कमज़ोरी नहीं मेरी मजबूरी है, क्योंकि कोई और बहाना मिलता नहीं थके दिमाग को आराम देने का। …
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तू मेरे पास जब भी आ जाए
· कविताएँवो जो अधूरा सादूर खड़ा है अपना जीवनहो जाएगा वो तो पूरामेरे पास अगर तुम आ जाओ, किसको है मुकम्मल जहाँ की उम्मीदकिसे चाहिए सब कुछ साबूतबस थोड़ी सी ख्वाहिश हैहम…
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वो डोर कहाँ टूटी ही थी
· कविताएँवो डोर कहाँ टूटी ही थीजिसको तुम टूटा जान रही होवो बात कहाँ भूली ही थीजिसको तुम भूला मान रही होऔर कहाँ बदला था कहीं कुछजिसको तुम बदला मान रही होसाल दो साल…
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दोबारा इस दुनिया में आने की ज़रूरत क्या है
· कविताएँबड़ी भीड़ है बाज़ार में जहां कभी मेरी माँ जाती थीआज मिलता है वहीं मुझे सुकून, वजह क्या है इश्क करता है हर कोई अपने तरीके सेफिर अंजाम एक सा होने…
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मैं वो आवारा हूँ
· कविताएँउकता गयी है अब रात भीमेरे देर तक जागने सेअब चली जाती है जल्दी हीछोड़ मुझे सहर के साथकोसता है मुझ ही कोसोता हुआ आफताबकि मेरी बेचैनीउसकी मोहब्बत में ख़लल…
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पुराना पार्क
· कविताएँजब कभी मन ऊबेतो उस पुराने पार्क में आइयेजिसमें उस पुरानी दोपहर काराज़ आज भी ताज़ा हैबहुतों ने छुआ होगा उस बड़े पत्थर कोपर आपके हाथों का एहसासआज भी ताज़ा हैप्यार…