बड़ी भीड़ है बाज़ार में जहां कभी मेरी माँ जाती थी
आज मिलता है वहीं मुझे सुकून, वजह क्या है
आज मिलता है वहीं मुझे सुकून, वजह क्या है
इश्क करता है हर कोई अपने तरीके से
फिर अंजाम एक सा होने का सबब क्या है
जो सरेआम होना ही है चोरी से लिखा ख़त
इश्क छुपाने की आखिर ज़रूरत क्या है
और अगर मिल जाए ख़ुशी एक कमरे में ही
महलों को बनाने की फिर ज़रूरत क्या है
खून बहा देते हैं जो ज़मीनों के ख़ातिर,बताएं वो ही
दो पल के सिवा इस दुनिया में और हिस्सा क्या है
पलटते हैं पन्ने सब इल्म पाने को,आखिर क्यों!
खून ही बहाना है तो इतनी मशक्कत क्या है
सितम सहने को यही ज़िन्दगी काफी है “अशांत”
दोबारा इस दुनिया में आने की ज़रूरत क्या है
-अशांत

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