वो जो अधूरा सा
दूर खड़ा है अपना जीवन
हो जाएगा वो तो पूरा
मेरे पास अगर तुम आ जाओ,
दूर खड़ा है अपना जीवन
हो जाएगा वो तो पूरा
मेरे पास अगर तुम आ जाओ,
किसको है मुकम्मल जहाँ की उम्मीद
किसे चाहिए सब कुछ साबूत
बस थोड़ी सी ख्वाहिश है
हम दोनों मुकम्मल हो जाएँ,
वो छाप तुम्हारी उंगली की
थी तो मेरे हाथों पर
अब छपी हुयी है दिल पर
पकड़ो हमेशा तुम हाथ जो मेरा
हमारा सपना पूरा हो जाए,
ना आशा है महलों की
ना धन का ही है मोह
आस्था जो हो तुम्हें मेरे प्रेम पर
हमारा जीवन पूरा हो जाए,
नव-वल्लरियों सा नया-नया
चमके अपना भी जीवन
लिपटें भाव कुछ हमारे ऐसे
दो का अस्तित्व एक हो जाए,
वो जो देखे हैं मैंने मन से
सपनें नहीं मेरा जीवन हैं
मूर्त रूप ले लेंगे उसी क्षण
तू मेरे पास जब भी आ जाए।
-प्रशांत

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