Poems

  • तुम्हारी पीठ पर

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    प्रकृति के नैसर्गिक कोष सेतुमने,पायी है जो सोने सी काया,उस प्रेम-पृष्ठ पर स्याही सेकभी कोई “टैटू ” ना गुदवाना,बस,हो सके तो सहेज लेना तुम,उन हस्ताक्षर कोजो अपनी उंगली सेकभी किये…

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  • कल, फिर क्यों तुम्हारी याद आयी?

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    सब कुछ रोज़ के जैसा थादेर से उठ कर देखा तोसूरज कुछ धीमा-धीमा था!कल, फिर क्यों तुम्हारी याद आयी? पढ़ रहा आज-कल मैं जिसेप्रथम-पृष्ठ उस पुस्तक का देखा तोपाया, तुम्हारी…

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  • वो भी हैं अंग तुम्हारे

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    ओ प्रियतमा! मत नोचवाओ तुम अपने बाल, वो भी हैं अंग तुम्हारे प्रतीक तुम्हारे स्वातंत्र्य का।  मैं प्रियतम भी फिर  कैसा सच्चा प्रेमी हूँ? अगर आधार मेरे प्रेम का  नहीं…

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  • मैं शांत हूँ आज

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    मैं शांत हूँ आज  पर थका नहीं हूँ मेरा बिस्तर पर लेटना  मेरी कमज़ोरी नहीं मेरी मजबूरी है, क्योंकि कोई और बहाना  मिलता नहीं  थके दिमाग को  आराम देने का। …

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  • जब कभी भी जाना

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    जब कभी भी जाना  तो मार देना मेरे प्रेम को भी, मैं नहीं चाहता  अब तक था जो मेरे अन्दर सबसे सुन्दर रूप  वो बने कभी भी कुरूप। कब तक…

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  • मोहब्बत चीज़ पुरानी थी

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    मोहब्बत चीज़ पुरानी थीअब उसका ना कोई मोलनये दौर के इश्क़ काब्राण्ड कुछ अलहदा है,ठीक चवन्नी वाली टाफी की तरहजो ‘नये रैपर’ मेंअब दस रुपये में मिलती है,पहले मिलती थीजो…

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  • ग़रीबी

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    ग़रीबी शरीर ही नहीं  दिमाग भी खा जाती है  जैसे कोई बिना जीभ का  आदमखोर राक्षस  जो स्वाद नहीं लेता  बस निगल जाता है  यूं ही। निगले जाते हैं  सपने…

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  • तू मेरे पास जब भी आ जाए

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    वो जो अधूरा सादूर खड़ा है अपना जीवनहो जाएगा वो तो पूरामेरे पास अगर तुम आ जाओ, किसको है मुकम्मल जहाँ की उम्मीदकिसे चाहिए सब कुछ साबूतबस थोड़ी सी ख्वाहिश हैहम…

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  • वो डोर कहाँ टूटी ही थी

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    वो डोर कहाँ टूटी ही थीजिसको तुम टूटा जान रही होवो बात कहाँ भूली ही थीजिसको तुम भूला मान रही होऔर कहाँ बदला था कहीं कुछजिसको तुम बदला मान रही होसाल दो साल…

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  • दोबारा इस दुनिया में आने की ज़रूरत क्या है

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    बड़ी भीड़ है बाज़ार में जहां कभी मेरी माँ जाती थीआज मिलता है वहीं मुझे सुकून, वजह क्या है इश्क करता है हर कोई अपने तरीके सेफिर अंजाम एक सा होने…

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