Poems
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फिर भी माँ मुझसे बात करती है
· कविताएँमैं कितना बुरा हूँफिर भी माँ मुझसे बात करती है, जिनके कारण लड़ा था मैं तुमसेअपना असली रंग दिखा गएपर तुम आज भी रंगी हुई होममता के अमिट रंग में,आज…
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कौन हो तुम?कहाँ हो तुम?
· कविताएँकल रात ही तो सपने मेंकॉफ़ी पी थी तुमने मेरे साथपर मेरी इस ज़िन्दगी में,इस सुबह मेंकौन हो तुम?कहाँ हो तुम? मेरे उस पुराने से कप पररखे थे तुमने अपने…
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और मैं नहीं हूँ
· कविताएँवो दीवार तुम्हारे घर कीआज भी उसी रंग की हैवो सब जो जैसा थाआज भी वैसा ही हैकोई फर्क न पड़ा हैज़िन्दगी में सिवा इसकेतुम बदले हुए होऔर मैं नहीं…
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सुन्दर फूल
· कविताएँफूल सुन्दर होते हैंमैंने भी लगाया था एक पौधाजिसमें फूल खिलते हैंहर एक नया खिलता पत्ताकली की आशा जगाता थामिटटी,खाद,पानी के साथनयन-प्रेम से उसको सींचा थाआशा में उस फूल कीरंग…
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मेरा जीवन तो पहले से निर्धारित था
· कविताएँमेरा जीवन तो पहले से निर्धारित थामैंने ही छेड़-छाड़ कीबाधित कर अविरल प्रवाहमध्यम वर्गी विचारों काजो थे उद्भवित मेरे मध्यम अस्तित्व सेचेष्टा कीकरने को आलिंगन नवीनसमाहित थे अपरोक्ष जिनमेंकुछ सुविचार…
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इत्तेफ़ाकन वो दिन याद आया आज
· कविताएँइत्तेफ़ाकन वो दिन याद आया आज जब चाय की चुस्कियां मैं बिन पिये ले लेता था आज भी पीते हैं मेरे जानने वाले पर इस महफ़िल में वो बेतकल्लुफ़ी कहाँ बेहिचक…
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नुमाइश प्यार की अपनी यहाँ मैं कर नहीं सकता
· कविताएँनुमाइश प्यार की अपनी यहाँ मैं कर नहीं सकतामैं सुन सकता हूँ तुमको लेकिन पढ़ नहीं सकतावो रुसवा हो के जिसके संग तुम खुश सी रहती होहंसा सकता है,पर आंसूँ तुम्हारे पी…
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जल पैरों में फोड़े और बिवाई भी देता है
· कविताएँअख़बार में “”जल-सत्याग्रह ” करतेवृद्ध कृषकों और ग्राम निवासियों के पैर देखे।वो ऐसे तो न थे जिन्हें देख कर उन्हें ज़मीन पर रखने से मना कर दूं।लेकिन मन ग्लानि ,व्यथा और…