Poems

  • रंग

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    इत्तेफाक़न वो रंग कुछ इस तरह आँखों में बसा और सभी रंग बेरंग हो गए  कुछ इस तरह रंगा मैंने तुम्हे रंगरेज़ बन कर मेरे सामने ही तुम्हारे हाथ पीले हो गए…

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  • व्यवासायिक प्रेम

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    उस चौराहे की बेंच आज भी वैसी है बस उम्र के कुछ साल और बढ़ गए वहां झुकी डाल आज भी वैसी है बस गिरने वाले फूल कम पड़ गए  वो पत्थर…

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  • सख्त दरवाज़े

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    सख्त दरवाज़े थे मेरे भी घर के पर वक़्त के साथ खुल गए वो जो कालिख़ लगी है कुण्डी पे और जो दरारे हैं पल्लों पे असर है उस आग…

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  • होगी मुझको चुभन भी

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    तन्हाई हसरत न थी कभी दिल की घूम फिर के दिल तन्हा फिर भी है ना मोहब्बत की कसक है ना रंजिश का असर है है रौशनी हर तरफ फैली…

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  • रुसवा

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    रुसवा हो जो फाड़ी थी मेरी चिट्ठियाँ,उम्मीद है उंगलियाँ तुम्हारी न दुखी होंगीदिल का मेरे हाल जो भी रहा हो,उम्मीद है तुम्हारी आँखें न भीगी होंगी वो जो खून टपका था…

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  • सूखा हुआ फूल

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    पुरानी धूल सनी किताब में सूखा हुआ फूल पाया है  जो आज भी महकता है बगीचे में खिले फूल जैसा महक उन यादों की जो आज तक जिन्दा है दुबकी…

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  • क्या हो गया

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    फ़िक्र इतनी है क्यों आज अंजाम कीवक़्त आग़ाज़ के कुछ तो सोचा ना थाथा वफ़ा का जो रंग सुर्ख लाल सापल में सूखा,भला ऐसा क्या हो गया वो जगह,वो समाँ…

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  • अनलिखा ख़त

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    कल आधी रात पढ़ा वो ख़तजो तुमने कभी लिखा ही नहींआंसुओं की स्याही भलाक्या कोई रंग लाती है! फिर भीआज सुबह से मन भारी हैलगता हैज़माने भर की धुंध मेरे…

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  • इलाहाबाद

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    तेरे पास था तो इतनी कद्र ना थी आज जाना तू सिर्फ शहर नहीं कुछ और  इमारतों पर चढ़ ये मुल्क  शायद ऊंचा हो जाए पर इलाहाबाद! तेरी रूह सिरमौर…

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  • घाव अभी ताज़ा है

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    कल ही की तो बात है मैं गिरा था अपने घर के आँगन में बस हलकी सी खरोंच ने माँ को रुला दिया था उस दिन दिल्ली में घायलों को…

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