Life
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प्रेम-सूर्य
· कविताएँमेरे कमरे में धुंध भर गयी है प्रेम-सूर्य कहाँ हो तुम? अब और न छिपो मुझसे मुझे कुछ दिखाई नहीं देता, मैं कब तक चलूँगा अंदाज़े से इन पथरीली राहों…
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चलो सब अदालतें बंद कर देते हैं!
· कविताएँअलसाती दिसंबरी ठंडी में जब कोहरा धूं-धूं उड़ता है रातें लम्बी होती हैं सूरज जब देर से चलता है उन्हीं सुबहों में जब मखमली कंबलों में पैर हमारे सिकुड़ते हैं…
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तुम जैसा जहान में नहीं
· कविताएँकभी कोई शक़ हो ख़ुद पर ले लेना मेरी नज़र तुम उधार, यक़ीन हो शायद तुम्हें उस पल तुम जैसा हुस्न जहान में नहीं। कभी कोई गिला हो ख़ुद पर…
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डूबता सूरज
· कविताएँऐ डूबते सूरज! क्या निगल सकते हो तुम? मुझे और मेरे संतापों को उस प्रकाश की तरह जो तुम्हारे डूबते ही चला जायेगा पृथ्वी से, जीवन से भी। ऐ डूबते…