Life
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प्रेम समर्पण
· कविताएँये प्रेम समर्पण मेरा तुम नैना स्वीकार करो सब सीमायें तोड़ कर निर्बन्ध मुझे तुम प्यार करो जो सुंदरता का मान तुम्हारा मुझको रखना होगा नित नयन से नयनों के…
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उँगलियों के बीच जगह खाली है
· कविताएँसुनी बहुत कहानी प्रेम की सबने ही सुनी होगी। क्या होता है प्रेम? जीने मरने के वादे साथ निभाने वाले इरादे या फिर शादी के धागे? कुछ तो होता होगा…
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धुआँ है वक़्त
· कविताएँधुआँ है वक़्त तुम्हारे होठों से जो निकला था कुछ हवा ने चुरा लिया कुछ रखा है हमने सँभाल के। उस भीड़ में जब कोई न देखता था किसी को…
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हृदय में मेरे आओ राम
· कविताएँपास मेरे अब आओ राम हृदय में रावण बैठा है हृदय में मेरे आओ राम काम करें कैसे निष्काम हाथों में रावण रहता है हाथ में मेरे आओ राम प्रेम…
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Plurality of Identities and Bharat
· EssaysThe concept of Bharat is not akin to the philosophy of European nation-state. Bharat, and by that effect, Bharatiyata is an amalgamation of plural identities that co-exist in our civilisational…