सुनी बहुत कहानी प्रेम की
सबने ही सुनी होगी।
क्या होता है प्रेम?
जीने मरने के वादे
साथ निभाने वाले इरादे
या फिर शादी के धागे?
कुछ तो होता होगा प्रेम
जो कुछ बता देता होगा
जो कुछ जता देता होगा
कुछ तो होता होगा प्रेम!
हाँ, शायद वही प्रेम है
जो अंत कर देता है
हर इच्छा का
समाप्त हो जाती है
जहाँ हर तृष्णा
हाँ, शायद यही प्रेम है।
प्रेम उसकी आँखों में है
जो तुम्हें दूर से देखता है
और तुम्हें पता चल जाता है,
प्रेम उसकी उँगलियों में है
जो तुम्हारी उँगलियों की खाली जगहें
अपनी से भर देता है।
हाँ, तुम्हारी उंगलियाँ
जिन्हें तुम
जब अपने बालों की अंगूठी पहनाती हो
तो और खूबसूरत हो जाती हैं
वही उँगलियाँ जिनसे तुमने
मुझे बस एक बार छुआ है।
प्रेम वहीं पनपेगा
जिस दिन तुम्हारी उँगलियों के बीच हर जगह
मेरी उँगलियों से भर जायेगी
और वहीं निकलेगा वो अंकुर
जो दुःख से दबे दबे
मर सा गया था।
सुनी होगी बहुत कहानी प्रेम की
सबने ही सुनी होगी।
पर,
ये परिभाषा नयी है
जो नहीं है किस्सा
किसी भी पाठ्यक्रम का।
प्रेम समझने के लिये
डूबना होगा
उतराना होगा
प्रेम करना होगा।
– अशान्त

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