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  • रुसवा

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    रुसवा हो जो फाड़ी थी मेरी चिट्ठियाँ,उम्मीद है उंगलियाँ तुम्हारी न दुखी होंगीदिल का मेरे हाल जो भी रहा हो,उम्मीद है तुम्हारी आँखें न भीगी होंगी वो जो खून टपका था…

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  • सूखा हुआ फूल

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    पुरानी धूल सनी किताब में सूखा हुआ फूल पाया है  जो आज भी महकता है बगीचे में खिले फूल जैसा महक उन यादों की जो आज तक जिन्दा है दुबकी…

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  • क्या हो गया

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    फ़िक्र इतनी है क्यों आज अंजाम कीवक़्त आग़ाज़ के कुछ तो सोचा ना थाथा वफ़ा का जो रंग सुर्ख लाल सापल में सूखा,भला ऐसा क्या हो गया वो जगह,वो समाँ…

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  • अनलिखा ख़त

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    कल आधी रात पढ़ा वो ख़तजो तुमने कभी लिखा ही नहींआंसुओं की स्याही भलाक्या कोई रंग लाती है! फिर भीआज सुबह से मन भारी हैलगता हैज़माने भर की धुंध मेरे…

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  • इलाहाबाद

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    तेरे पास था तो इतनी कद्र ना थी आज जाना तू सिर्फ शहर नहीं कुछ और  इमारतों पर चढ़ ये मुल्क  शायद ऊंचा हो जाए पर इलाहाबाद! तेरी रूह सिरमौर…

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  • कहाँ तुम चले गए?

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    तुम चले जाओगे तब सोचेंगे,हमने क्या खोया हमने क्या पाया  आज संगीत की विधा ने एक चमकता हुआ सितारा सदैव के लिए खो दिया. ग़ज़ल-ए-आज़म जगजीत सिंह के लिए आज…

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  • तकनीकी विकास का बच्चों पर दुष्परिणाम

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    विकास एक ऐसी दोधारी तलवार है,जिसका अगर विवेकपूर्ण उपयोग ना किया जाए तो वह हमारी उन्नति एवं आत्मरक्षा का साधन होने के बजाय विनाश का कारक भी बन सकता है.…

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  • घाव अभी ताज़ा है

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    कल ही की तो बात है मैं गिरा था अपने घर के आँगन में बस हलकी सी खरोंच ने माँ को रुला दिया था उस दिन दिल्ली में घायलों को…

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  • Government should negotiate Terrorism!!

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                World is a theatre and terrorists are using it not for enthralling the audience, but for spreading the terror. The scourge of terrorism is…

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  • De novo

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    This blog aims at presenting the legal  issues concerning us all in simple way. Comments-benign and lethal-are equally welcome. 

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