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  • महताब

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    मेरी सोच का महताब वैसा ना हैजैसा देखा होगा तुमने फलक परये ना निकलता है रात मेंना डूबता है दिन मेंगुरनूर  है मेरे दिल में, जैसे कोईना भूली हुयी याद…

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  • तुम आये नहीं घर मेरे बहुत दिन से

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    तुम आये नहीं घर मेरे बहुत दिन सेलगता है मेरे ख़्वाब गये हैं छिन से बदला नहीं है कुछ अब भीये ईंटों का ढाँचा अब तक खड़ा हैकुछ नाज़ुक किनारों को…

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  • मन का जहाज

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    गिराया वक़्त ने बहुत लेकिनबेशर्म निकला मैं भी बहुतइतना किअब कोई चोट दर्द नहीं देतीअब कोई गाली खीझ नहीं देतीअब कोई हार ग़म नहीं देतीअब कोई बात कोई रंग नहीं…

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  • तिनका

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    एक तिनका हूँ मैं उस बूढ़े पेड़ काझूमता खड़ा है जो उस मोड़ परसुलभित,प्रसन्न था मैं भी कभीढोते हुए उसकी पत्तियाँपर आज बात कुछ और हैगिर गया हूँ मैं,सूखी सारी पत्तियांइस…

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  • तलाश अभी जारी है….

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    आईना देखता हूँ रोज़तलाशने चेहरा अपनापर हर रोज़ ही,सामनेकोई और शख्सखड़ा नज़र आता है निकलता हूँ जब घर सेढूँढने इंसान कोई जैसे अपनाअफ़सोस, हर रोज़ हीहर शख्समुझसे जुदा नज़र आता…

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  • संगम

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    प्रस्तुत लघु-कथा एक कल्पना मात्र है। किसी भी जीवित या मृत व्यक्ति या किसी वस्तु से किसी भी प्रकार की समानता, मात्र एक संयोग है। लेखक का आशय किसी भी विचारधारा या मनुष्य…

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  • प्रेम सुन्दर था

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    प्रेम सुन्दर था  बंधा मन की सीमाओं में,  धृष्टता कर लाँघा उसको  पहुंचा शरीर के पास  जहां देकर क्षणिक सुख  उसको नोचा खसोटा गया, फिर फेंक दिया बहुत दूर  मिटा दिए…

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  • Wrapper of Alpenliebe

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    Adolescence captures the essence of love,as every move made towards it at this age, is genuinely novel in its attribute. Earth outside was smelling of rain that evening.Temperature had dipped…

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  • इस मुरव्वत की वजह ही नहीं

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    सिमट आये सब दर्द इस दिल में,इतनी इसमें जगह भी नहींज़फ़ा कर के आप छुप जाएँ,ऐसी कोई वजह भी नहींयकीन किया था हमनें खुद ही,आपका कभी कोई इशारा ना थाआंसूं बहायें आप…

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  • दिमाग़-ओ-दिल

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    अच्छा हूँ या बुरा पता ही नहीं, ना जाने क्या है गलत क्या है सही, ढूँढा बगल अपने कौन कौन है, दिमाग ना था और दिल भी नहीं, मुड़ के…

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