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तुम आये नहीं घर मेरे बहुत दिन से
· कविताएँतुम आये नहीं घर मेरे बहुत दिन सेलगता है मेरे ख़्वाब गये हैं छिन से बदला नहीं है कुछ अब भीये ईंटों का ढाँचा अब तक खड़ा हैकुछ नाज़ुक किनारों को…
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मन का जहाज
· कविताएँगिराया वक़्त ने बहुत लेकिनबेशर्म निकला मैं भी बहुतइतना किअब कोई चोट दर्द नहीं देतीअब कोई गाली खीझ नहीं देतीअब कोई हार ग़म नहीं देतीअब कोई बात कोई रंग नहीं…
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तलाश अभी जारी है….
· कविताएँआईना देखता हूँ रोज़तलाशने चेहरा अपनापर हर रोज़ ही,सामनेकोई और शख्सखड़ा नज़र आता है निकलता हूँ जब घर सेढूँढने इंसान कोई जैसे अपनाअफ़सोस, हर रोज़ हीहर शख्समुझसे जुदा नज़र आता…
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प्रेम सुन्दर था
· कविताएँप्रेम सुन्दर था बंधा मन की सीमाओं में, धृष्टता कर लाँघा उसको पहुंचा शरीर के पास जहां देकर क्षणिक सुख उसको नोचा खसोटा गया, फिर फेंक दिया बहुत दूर मिटा दिए…
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इस मुरव्वत की वजह ही नहीं
· कविताएँसिमट आये सब दर्द इस दिल में,इतनी इसमें जगह भी नहींज़फ़ा कर के आप छुप जाएँ,ऐसी कोई वजह भी नहींयकीन किया था हमनें खुद ही,आपका कभी कोई इशारा ना थाआंसूं बहायें आप…
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दिमाग़-ओ-दिल
· कविताएँअच्छा हूँ या बुरा पता ही नहीं, ना जाने क्या है गलत क्या है सही, ढूँढा बगल अपने कौन कौन है, दिमाग ना था और दिल भी नहीं, मुड़ के…