Love

  • काश!

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    काश! सुलझ जाती कुछ उलझनें;उंगलियों में घूमता हुआ वो धागातुमने उलझाने के लिये तो न लपेटा होगा,गोरी उंगलियों पर लिपटीकाले धागे की कई परतेंअंगूठी है उस रिश्ते कीजिसे न किसी…

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  • पुराने नोट्स

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    सफल लोगों का कहना हैपीछे मत देखोआज में जियोआज में ही तुम्हारा कल है;पर, प्रेमी जीव क्या करेप्रेम बंध नहीं पाता सीमाओं मेंभूत,वर्तमान और भविष्य की,न ही समझ पाता है…

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  • मैं तुम्हे देख रहा हूँ

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    तुम्हे पता है क्या?तुम्हारी खिड़की से झांकता चाँदमेरा जासूस है। जब सो जाती हो तुमतब वो बताता है मुझकोकिस करवट लेटी हो तुम,मैं भी वैसे बदल लेता हूँ करवटसुनते हैं…

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  • भटकाव

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    बात कुछ साल पहले की हैमैं भी निकला था घर सेमंज़िल की तरफ़पर वहाँ कभी पहुँचा नहीं,ढूँढ़ रहा है मुझे कोई आज वहाँकौन है वो?पता नहीं!सुना है,आत्मायें भूलती नहींभटक जाती…

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  • मेरी भी नज़र में

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    मोबाईल की स्क्रीन पर देखते देखतेकुछ यूँ हँसी तुम्हारी आँखेंएक मुस्कुराहट दौड़ सी गयीमेरी भी नज़र में वो सपनों के नगर मेंएक छोटे से कोने मेंयूँ बेफ़िक्र लेटे थे तुमदुनिया…

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  • पहली धुंध

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    कुछ धुंधला था मेरा सपनाधुंधली थी मेरी सुबहअगर कुछ भी नहींतो, आँखें ज़रूर धुंधली थीं। सुबह सुबह तुम बैठी थीमेरी मेज़ परजैसे कोई अधखुली किताबबुकमार्क से लग रहे थेतुम्हारे चेहरे…

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  • आम प्रेम

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    प्रेम जब पक नहीं पाताकसैला हो जाता है,उस आम की तरहजो न चूसा जा सकता हैन खाया जा सकता हैन बनाया जा सकता है अचार ही। हम अक्सर क्यों भूल…

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  • पाक़ रूह

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    पाक़ रूह से गुफ़्तगू का नतीजा ये हैआइना देखने की आदत छूट गयी वो कुछ यूँ गये हमारी ज़िन्दगी सेहँसती हुयी ज़िन्दगी हमसे रूठ गयी कल उन्हें देखने की बहुत…

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  • मिल भी जाये

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    मिल भी जाये कुछ यूँ ज़िन्दगी मुझ सेन वो न मैं कभी एक दुसरे से परेशान हों यूँ देखें मुझे वो छुपी नज़र सेमेरे बस वो ही एक कद्रदान हों…

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  • फाल्गुनी दोपहर

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    फाल्गुन की एक दोपहर वो भी थीजब तुम मेरे पास थी,चमकता चेहराआँखों तक मुस्कान,तुमने पहनी थीहमारे प्यार की लाल चूड़ियाँऔर कुछ भी नहीं;आज तुम नहीं हो, औरचाहे जो भी हो…

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