Love
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ज़रूरी नहीं है
· कविताएँमैं अब चुप हूँ बस तेरे लिये ऐ जाँ यादें हैं काफी ज़ुबाँ ज़रूरी नहीं है न वो बोलते हैं न हम बोलते हैं समझना न ये कि बात होती…
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प्रेम-सूर्य
· कविताएँमेरे कमरे में धुंध भर गयी है प्रेम-सूर्य कहाँ हो तुम? अब और न छिपो मुझसे मुझे कुछ दिखाई नहीं देता, मैं कब तक चलूँगा अंदाज़े से इन पथरीली राहों…