Love

  • दोहे प्रेम के

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    मैं प्रेम के लिये किसी भी एक दिवस निर्धारण वाले विचार से सहमत नहीं हूँ। लेकिन बाज़ार की रवायत का कुछ असर मुझ पर भी पड़ना लाजिमी है। और इसी क्रम…

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  • "ऋचांकित" तुम्हारा प्यार!

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    अपने प्रिय मित्र अंकित के विवाह के अवसर पर ये कविता लिखी है।  प्रेम जैसे पूर्ण भाव को शब्दों में तो व्यक्त नहीं किया जा सकता, किन्तु अपनी भावनाओं की अभिव्यक्ति का…

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  • मोहब्बत चीज़ पुरानी थी

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    मोहब्बत चीज़ पुरानी थीअब उसका ना कोई मोलनये दौर के इश्क़ काब्राण्ड कुछ अलहदा है,ठीक चवन्नी वाली टाफी की तरहजो ‘नये रैपर’ मेंअब दस रुपये में मिलती है,पहले मिलती थीजो…

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  • वो डोर कहाँ टूटी ही थी

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    वो डोर कहाँ टूटी ही थीजिसको तुम टूटा जान रही होवो बात कहाँ भूली ही थीजिसको तुम भूला मान रही होऔर कहाँ बदला था कहीं कुछजिसको तुम बदला मान रही होसाल दो साल…

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  • प्रेम सुन्दर था

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    प्रेम सुन्दर था  बंधा मन की सीमाओं में,  धृष्टता कर लाँघा उसको  पहुंचा शरीर के पास  जहां देकर क्षणिक सुख  उसको नोचा खसोटा गया, फिर फेंक दिया बहुत दूर  मिटा दिए…

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  • Wrapper of Alpenliebe

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    Adolescence captures the essence of love,as every move made towards it at this age, is genuinely novel in its attribute. Earth outside was smelling of rain that evening.Temperature had dipped…

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  • कौन हो तुम?कहाँ हो तुम?

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    कल रात ही तो सपने मेंकॉफ़ी पी थी तुमने मेरे साथपर मेरी इस ज़िन्दगी में,इस सुबह मेंकौन हो तुम?कहाँ हो तुम? मेरे उस पुराने से कप पररखे थे तुमने अपने…

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