Love
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मैं तुमसे मिलना चाहता हूँ
· कविताएँमैं तुमसे मिलना चाहता हूँनहीं चुप चांदनी रात में,मैं तुमसे मिलना चाहता हूँबड़े शहर की बोलती रात में,मैं तुम्हें देखना चाहता हूँसड़क की दूधिया ट्यूबलाइट में; क्योंकिचाँदनी कवियों ने पुरानी…
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दो अधूरे लोग
· कविताएँमैं सब कुछ लिख दूँगीतुम सब कुछ पढ़ लोगे,मैं सब कुछ कह दूँगीतुम सब कुछ सुन लोगे,दो अधूरे लोगों में फिरबचा क्या रह जायेगा? क्यों कहते नहीं तुम कुछलिखते क्यों…
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जब तुम मिल जाती हो
· कविताएँतुम नसीम सी हो मन महक जाता है जब तुम मिल जाती हो। तुम दुआ सी हो बला टल जाती है जब तुम मिल जाती हो। तुम धागे सी होभावों…
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मैं तुमसे क्या मांग सकता हूँ?
· कविताएँमैं तुमसे क्या मांग सकता हूँ?क्या माँगना स्वाभिमान है?एक मध्य-वर्गीय शोषित हूँ मैंमेरी हड्डियाँ नहीं गली हैंमेरे पीठ-पेट नहीं हैं एकमेरा कमरा किताबों सेफ़ोन कई छूटी कालों सेघर आशावान घरवालों…
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तीन डंठलों वाला पौधा
· कविताएँतुम्हारे दिये पौधे में बस तीन डंठलें बची हैं, सब दिखता है शीशे के गमले के आर-पार इसलिये उस में नहीं जमा होने दी कभी कोई गन्दगी; दावा तो नहीं…