बात कुछ साल पहले की है
मैं भी निकला था घर से
मंज़िल की तरफ़
पर वहाँ कभी पहुँचा नहीं,
ढूँढ़ रहा है मुझे कोई आज वहाँ
कौन है वो?
पता नहीं!
सुना है,
आत्मायें भूलती नहीं
भटक जाती हैं।
मैं चल रहा हूँ
या भटक रहा हूँ?
-प्रशान्त
बात कुछ साल पहले की है
मैं भी निकला था घर से
मंज़िल की तरफ़
पर वहाँ कभी पहुँचा नहीं,
ढूँढ़ रहा है मुझे कोई आज वहाँ
कौन है वो?
पता नहीं!
सुना है,
आत्मायें भूलती नहीं
भटक जाती हैं।
मैं चल रहा हूँ
या भटक रहा हूँ?
-प्रशान्त

– अशान्त
– Ashant
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