फाल्गुनी दोपहर

– अशान्त ·

– Ashant ·

· in

फाल्गुन की एक दोपहर वो भी थी
जब तुम मेरे पास थी,
चमकता चेहरा
आँखों तक मुस्कान,
तुमने पहनी थी
हमारे प्यार की लाल चूड़ियाँ
और कुछ भी नहीं;
आज तुम नहीं हो, और
चाहे जो भी हो मौसम
मेरा जीवन,
अब जेठ की सुलगती दोपहरी है!

-प्रशान्त

– अशान्त

– Ashant

अशान्त की चिट्ठी

Letters from Small City Thinker. New writing, straight to your inbox.

Comments

Leave a Reply