Life

  • मैं स्वतन्त्र हूँ

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    जिस दिन,  बिना झूठ बोले बिना बात बनाये  बिना भेष बदले  बिना कुछ गलत कहे बिना कोई और बने  मैं सच बोल सकूँगा  मैं मानूँगा  कि, मैं स्वतन्त्र हूँ।   …

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  • पहली धुंध

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    कुछ धुंधला था मेरा सपनाधुंधली थी मेरी सुबहअगर कुछ भी नहींतो, आँखें ज़रूर धुंधली थीं। सुबह सुबह तुम बैठी थीमेरी मेज़ परजैसे कोई अधखुली किताबबुकमार्क से लग रहे थेतुम्हारे चेहरे…

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  • प्रदूषण

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    पार्टिकुलेट मैटर 2.5बढ़ गये हैंहवा की तरहमेरे जीवन में भी;शिथिल हो रहे हैं मेरे स्वप्नमेरे फेफड़ों जैसेकाश! रोक पाताइन्हें कोई मास्क। भावुक मनुष्य नहीं रोक पाताअपनी क़िस्मतयादों और आदत को;ये…

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  • रावण

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    सोचता हूँ कि रावण बन जाऊं  क्योंकि, आज कल  सरल तरीके से  राम के मिलने की  संभावना कम है।  कुछ बुरा नहीं है  रावण बनना भी, वो ज्ञानी था  वो सफल…

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  • दर्द ना समझे जाने का

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    क्या कभी सोचा है  क्यों मुरझा जाता है  कोई ग़ुलाब  जैसे कभी खिला न हो  सुनो कभी सूखी गिरी पंखुड़ियों को  कहती हैं  उन्हें बदलते मौसम ने  कभी समझा नहीं। …

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  • प्रेम की मौत

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    जो कल चले गये साथ जीने कोदूसरी दुनिया मेंइस दुनिया की नज़र मेंकायर हैं,वाह रे दुनिया!बदल जाते हैं तुम्हारे नियमसावन के बादल की तरहजो गरजते तो हैं, परसब पर बराबर…

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  • कोई मेरी याद मिटा दो

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    मैं देख न पाऊँ खुद को भी सब मेरे निशान मिटा दोअब दर्द मेरा भी कुछ कम हो कोई मेरी याद मिटा दो ये चेहरे पे मेरी जो झूठी मुस्कानों का…

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  • मैं वहां पहुँच न जाऊँ!

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    बात कुछ भी करने की होतीतो कब का कर लिया होताकुछ न कुछ;बात थी अपना सपना पूरा करने कीजिसे नापा था मैंनेउस दोपहर लन्च ब्रेक मेंअपने क़दमों सेउस बंगले के…

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  • बिल्ली

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    जब भी कोई मनुष्यरखता है ऊंचा लक्ष्यचलता है ऐसे पथ परजिस पर भीड़ नहींऐसे में,असफल होते हीउसकी आत्मा बिल्ली हो जाती हैऔर,टूट पड़ती हैं उस परसमाज की अपेक्षाएं और तानेकुत्तों  की तरह;कर…

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  • कटते रहोगे तुम

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    जब अपने ही बदल जायें तो क्या कर लोगे तुमचलने लगेगी जब ज़मीन कितना ठहर लोगे तुम रिश्ते, इश्क़,दोस्ती, सब जज़्बा-ए-दिल हैंदिल ही बदल जायें तो क्या कर लोगे तुम कम थे…

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