Life
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मैं स्वतन्त्र हूँ
· कविताएँजिस दिन, बिना झूठ बोले बिना बात बनाये बिना भेष बदले बिना कुछ गलत कहे बिना कोई और बने मैं सच बोल सकूँगा मैं मानूँगा कि, मैं स्वतन्त्र हूँ। …
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दर्द ना समझे जाने का
· कविताएँक्या कभी सोचा है क्यों मुरझा जाता है कोई ग़ुलाब जैसे कभी खिला न हो सुनो कभी सूखी गिरी पंखुड़ियों को कहती हैं उन्हें बदलते मौसम ने कभी समझा नहीं। …
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प्रेम की मौत
· कविताएँजो कल चले गये साथ जीने कोदूसरी दुनिया मेंइस दुनिया की नज़र मेंकायर हैं,वाह रे दुनिया!बदल जाते हैं तुम्हारे नियमसावन के बादल की तरहजो गरजते तो हैं, परसब पर बराबर…
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कोई मेरी याद मिटा दो
· कविताएँमैं देख न पाऊँ खुद को भी सब मेरे निशान मिटा दोअब दर्द मेरा भी कुछ कम हो कोई मेरी याद मिटा दो ये चेहरे पे मेरी जो झूठी मुस्कानों का…
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मैं वहां पहुँच न जाऊँ!
· कविताएँबात कुछ भी करने की होतीतो कब का कर लिया होताकुछ न कुछ;बात थी अपना सपना पूरा करने कीजिसे नापा था मैंनेउस दोपहर लन्च ब्रेक मेंअपने क़दमों सेउस बंगले के…
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कटते रहोगे तुम
· कविताएँजब अपने ही बदल जायें तो क्या कर लोगे तुमचलने लगेगी जब ज़मीन कितना ठहर लोगे तुम रिश्ते, इश्क़,दोस्ती, सब जज़्बा-ए-दिल हैंदिल ही बदल जायें तो क्या कर लोगे तुम कम थे…