Prosopoetry

  • खाली सुबह

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    आज,न सूरज हैन हवा हैन रोशनी हैन सुख हैन दुःख है न सफलता हैन असफलता हैन साँसें हैंन मृत्यु हैन ही तुम हो;आज सुबह खाली है-जिसमें सब निरन्तर गिरा जा…

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  • शहद

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    शहद की एक बूँदजो अपने धड़े से जुड़ी हुयीखिंचती ही चली जा रही थीआज ज़मीन पर गिर गयी,एक बच्चे ने चखा तो पायावो अब मीठी नहीं थी-थी तो बस एक…

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  • रूठी कोयल

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    रोज़ एक कोयल आती थी छत परले कर कुछ तिनके कुछ दानेरोज़ जी उठता था बचपनजब गाती थी वो कोकिल गाने;जब से सूख गये सब नैनाअब उसका कोई अपना है…

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  • कौन हूँ मैं?

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    पन्नों पे बिखरी स्याही देख के एक दिनख़्याल कहीं से कुछ आया ऐसाक्या ये लिखावट मेरी ही है?क्या मैंने ही लिखी थी ये कहानी?फिर कुछ डर ऐसा आया दिल मेंजो…

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  • मन

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    बाहर का सब सचबन्द आँखों से अंदर ही दिखाई देता हैसब लिख जाता है सरकारी रजिस्टर परअधकचरी भाषा में-न कोई विन्यासन कोई व्याकरण;आज कोशिश की उसी को पढ़ने कीकोई पक्षपात…

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  • पूर्ण विराम

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    बहुत पहले लिखते समय पहला वाक्यमाँ ने सिखाया था पूर्ण विरामजिसको लगाने के बाद हीशुरू होता था नया वाक्य;निरन्तर चलते हुये जीवन मेंकुछ अर्ध-विरामों के अलावासब बस चलता ही रहा,…

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  • रद्दी

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    बहुत दिनों बाद आज आँधी आयी थी-  चेहरे पर, आँखों के कोरों में, बालों में, खिसखिसाते दाँतों  में, धूल जम गयी है; पर  सबसे बुरा ये हुआ  सालों की सहेजी…

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  • तीन डंठलों वाला पौधा

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    तुम्हारे दिये पौधे में  बस तीन डंठलें बची हैं,  सब दिखता है  शीशे के गमले के आर-पार  इसलिये उस में नहीं जमा होने दी  कभी कोई गन्दगी; दावा तो नहीं…

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  • The Morning after Love

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    He sensed her from a distance but never went closeShe snuggled in the assurance of his charm up closeNot a word was spoken or would ever be spokenShe gestured from…

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