Prosopoetry
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कौन हूँ मैं?
· कविताएँपन्नों पे बिखरी स्याही देख के एक दिनख़्याल कहीं से कुछ आया ऐसाक्या ये लिखावट मेरी ही है?क्या मैंने ही लिखी थी ये कहानी?फिर कुछ डर ऐसा आया दिल मेंजो…
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पूर्ण विराम
· कविताएँबहुत पहले लिखते समय पहला वाक्यमाँ ने सिखाया था पूर्ण विरामजिसको लगाने के बाद हीशुरू होता था नया वाक्य;निरन्तर चलते हुये जीवन मेंकुछ अर्ध-विरामों के अलावासब बस चलता ही रहा,…
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तीन डंठलों वाला पौधा
· कविताएँतुम्हारे दिये पौधे में बस तीन डंठलें बची हैं, सब दिखता है शीशे के गमले के आर-पार इसलिये उस में नहीं जमा होने दी कभी कोई गन्दगी; दावा तो नहीं…