खाली सुबह

– अशान्त ·

– Ashant ·

· in

आज,
न सूरज है
न हवा है
न रोशनी है
न सुख है
न दुःख है
न सफलता है
न असफलता है
न साँसें हैं
न मृत्यु है
न ही तुम हो;
आज सुबह खाली है-
जिसमें सब निरन्तर गिरा जा रहा है,
अब इच्छा है
कहीं तो ज़मीन मिले
थके हुये पैरों को
चोटिल आत्मा को।

– अशान्त

– अशान्त

– Ashant

अशान्त की चिट्ठी

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