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हिन्दी में कविताएँ, कहानियाँ और लेख। Poems, stories and essays in Hindi.
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तुम्हारी पीठ पर
· कविताएँप्रकृति के नैसर्गिक कोष सेतुमने,पायी है जो सोने सी काया,उस प्रेम-पृष्ठ पर स्याही सेकभी कोई “टैटू ” ना गुदवाना,बस,हो सके तो सहेज लेना तुम,उन हस्ताक्षर कोजो अपनी उंगली सेकभी किये…
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कल, फिर क्यों तुम्हारी याद आयी?
· कविताएँसब कुछ रोज़ के जैसा थादेर से उठ कर देखा तोसूरज कुछ धीमा-धीमा था!कल, फिर क्यों तुम्हारी याद आयी? पढ़ रहा आज-कल मैं जिसेप्रथम-पृष्ठ उस पुस्तक का देखा तोपाया, तुम्हारी…
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एक पीली छतरी
· लेखपीला उत्साह का रंग है। एक ऐसा रंग जो प्रकृति के प्रकाश-पुंज सूर्य का वृहद् प्रतिबिम्ब है। उसकी अगाध ऊर्जा का सर्वत्र विद्यमान चिन्ह है। कुछ ऐसी ही ऊर्जावान लगी उदय प्रकाश जी…
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वो भी हैं अंग तुम्हारे
· कविताएँओ प्रियतमा! मत नोचवाओ तुम अपने बाल, वो भी हैं अंग तुम्हारे प्रतीक तुम्हारे स्वातंत्र्य का। मैं प्रियतम भी फिर कैसा सच्चा प्रेमी हूँ? अगर आधार मेरे प्रेम का नहीं…
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मैं शांत हूँ आज
· कविताएँमैं शांत हूँ आज पर थका नहीं हूँ मेरा बिस्तर पर लेटना मेरी कमज़ोरी नहीं मेरी मजबूरी है, क्योंकि कोई और बहाना मिलता नहीं थके दिमाग को आराम देने का। …
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जब कभी भी जाना
· कविताएँजब कभी भी जाना तो मार देना मेरे प्रेम को भी, मैं नहीं चाहता अब तक था जो मेरे अन्दर सबसे सुन्दर रूप वो बने कभी भी कुरूप। कब तक…
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मोहब्बत चीज़ पुरानी थी
· कविताएँमोहब्बत चीज़ पुरानी थीअब उसका ना कोई मोलनये दौर के इश्क़ काब्राण्ड कुछ अलहदा है,ठीक चवन्नी वाली टाफी की तरहजो ‘नये रैपर’ मेंअब दस रुपये में मिलती है,पहले मिलती थीजो…
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तू मेरे पास जब भी आ जाए
· कविताएँवो जो अधूरा सादूर खड़ा है अपना जीवनहो जाएगा वो तो पूरामेरे पास अगर तुम आ जाओ, किसको है मुकम्मल जहाँ की उम्मीदकिसे चाहिए सब कुछ साबूतबस थोड़ी सी ख्वाहिश हैहम…
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वो डोर कहाँ टूटी ही थी
· कविताएँवो डोर कहाँ टूटी ही थीजिसको तुम टूटा जान रही होवो बात कहाँ भूली ही थीजिसको तुम भूला मान रही होऔर कहाँ बदला था कहीं कुछजिसको तुम बदला मान रही होसाल दो साल…