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हिन्दी में कविताएँ, कहानियाँ और लेख। Poems, stories and essays in Hindi.

  • नया सफ़र

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    पाँव सुन्न हैंदिमाग भी,पिछले कई सालों सेकुछ बदला ही नहींअब सपने भी लगे हैं दोहरानेखुद को,शायद ज़रूरत है मुझेनये सफ़र की। इंसान ढूंढ़ता हैनये सहारेजब ढह जाती हैंबनी बनायी इमारतें,मेरे…

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  • भटकाव

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    बात कुछ साल पहले की हैमैं भी निकला था घर सेमंज़िल की तरफ़पर वहाँ कभी पहुँचा नहीं,ढूँढ़ रहा है मुझे कोई आज वहाँकौन है वो?पता नहीं!सुना है,आत्मायें भूलती नहींभटक जाती…

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  • सर्द गिलहरी

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    मेरा दोस्त कहा करता था मुझसेसर्दी मौसम है सुस्त लोगों कामैंने भी बोला था बचपने मेंमुझे सर्दी पसंद है,कहते हैं लोगसर्दी मौसम है डिप्रेस्ड लोगों कामुझे डिप्रेशन भी है! पर,…

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  • मेरा सूरज

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    खिड़कियाँ खुली रखनी चाहियेसर्दी में भीक्या पता उड़ के आ जायेकोई ओस से भीगा फूल। चाहे कितनी भी गहरी हो ज़िन्दगी में धुंधउसे हारना ही है एक दिनकिसी न किसी…

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  • मेरी भी नज़र में

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    मोबाईल की स्क्रीन पर देखते देखतेकुछ यूँ हँसी तुम्हारी आँखेंएक मुस्कुराहट दौड़ सी गयीमेरी भी नज़र में वो सपनों के नगर मेंएक छोटे से कोने मेंयूँ बेफ़िक्र लेटे थे तुमदुनिया…

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  • मैं स्वतन्त्र हूँ

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    जिस दिन,  बिना झूठ बोले बिना बात बनाये  बिना भेष बदले  बिना कुछ गलत कहे बिना कोई और बने  मैं सच बोल सकूँगा  मैं मानूँगा  कि, मैं स्वतन्त्र हूँ।   …

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  • पहली धुंध

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    कुछ धुंधला था मेरा सपनाधुंधली थी मेरी सुबहअगर कुछ भी नहींतो, आँखें ज़रूर धुंधली थीं। सुबह सुबह तुम बैठी थीमेरी मेज़ परजैसे कोई अधखुली किताबबुकमार्क से लग रहे थेतुम्हारे चेहरे…

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  • प्रदूषण

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    पार्टिकुलेट मैटर 2.5बढ़ गये हैंहवा की तरहमेरे जीवन में भी;शिथिल हो रहे हैं मेरे स्वप्नमेरे फेफड़ों जैसेकाश! रोक पाताइन्हें कोई मास्क। भावुक मनुष्य नहीं रोक पाताअपनी क़िस्मतयादों और आदत को;ये…

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  • रावण

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    सोचता हूँ कि रावण बन जाऊं  क्योंकि, आज कल  सरल तरीके से  राम के मिलने की  संभावना कम है।  कुछ बुरा नहीं है  रावण बनना भी, वो ज्ञानी था  वो सफल…

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  • दर्द ना समझे जाने का

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    क्या कभी सोचा है  क्यों मुरझा जाता है  कोई ग़ुलाब  जैसे कभी खिला न हो  सुनो कभी सूखी गिरी पंखुड़ियों को  कहती हैं  उन्हें बदलते मौसम ने  कभी समझा नहीं। …

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