कविताएँ

कविताएँ और ग़ज़लें। Poems and ghazals in Hindi.

  • बहुत दिनों से

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    बहुत दिनों सेमैंने देखा नहीं तुमकोऔर ना हीसुनी तुम्हारी आवाज़पर,एक छाया धुंधली सीहै रेखांकित कहीं मन मेंजिसमें दिख तो नहीं रहीपर खुल के खिलखिला रही हो तुम। नहीं है उस…

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  • पहली ईंट

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     सतत प्रयासों के फलित ना होने की कुंठा ही इस कविता के सृजन का कारण हैं। एक छटपटाहट है अपने तत्व को फिर से पाने की जो शायद जीवन की…

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  • महल की खिड़की

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    विकास एवं प्रगति सदैव प्रसन्नता का स्त्रोत हों,यह आवश्यक नहीं है। इस कविता में सोने की खिड़की पर बैठी चिड़िया के माध्यम से भौतिक रूप से सम्पूर्ण मनुष्य की आत्मिक अभिलाषा…

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  • दोहे प्रेम के

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    मैं प्रेम के लिये किसी भी एक दिवस निर्धारण वाले विचार से सहमत नहीं हूँ। लेकिन बाज़ार की रवायत का कुछ असर मुझ पर भी पड़ना लाजिमी है। और इसी क्रम…

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  • "ऋचांकित" तुम्हारा प्यार!

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    अपने प्रिय मित्र अंकित के विवाह के अवसर पर ये कविता लिखी है।  प्रेम जैसे पूर्ण भाव को शब्दों में तो व्यक्त नहीं किया जा सकता, किन्तु अपनी भावनाओं की अभिव्यक्ति का…

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  • दूसरी है

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    फूल वही है,पर मेरी नज़र दूसरी है। ओस वही है,पर मेरी छुअन दूसरी है। शब्द वही हैं,पर मेरी सोच दूसरी है। लक्ष्य वही है,पर मेरी लगन दूसरी है। पूजा वही…

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  • मृत्यु

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    मृत्यु सत्य है,किन्तु तभीजब वह प्राकृतिक हो,अन्यथा है वोएक भद्दा नाटकजिसे खुद हीलिखा-निर्देशितकिया गया हो,जिसे देखा भी होतुमने अकेलेऔर किया हो अकेले हीवो अंतिम अभिनय,समाप्त हो गया जिसके बादसब कुछ,रह गया खाली…

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  • दंगा

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    जो हुआ है हलाल  पिछले चौराहे पर, ना हिन्दू था ना मुस्लिम था  और, ना ही कोई मुर्गा था जिसे मारा गया लेने को स्वाद; वो ठंडी बे-मज़हब लाश  है…

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  • बिना दाग़ वाला चाँद

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    शायद मैने सुबह देखा था उसे, इसीलिये मुझे लगा वो  बिना दाग़ वाला चाँद रोज़ सूरज छुपा देता था उसे, आज डाँक कर दूसरी छत से देखा तो पाया ना उसमें…

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  • लापता कर गये

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    ढूंढते थे पता मेरा कल जो  कभी,लोग वो ही मुझे लापता कर गये । दे दी सज़ा हमने सह भी लिया,ना जाने क्या हम ख़ता कर गये। जिनकी महफ़िल की मैं…

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