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हिन्दी में कविताएँ, कहानियाँ और लेख। Poems, stories and essays in Hindi.

  • कुछ लिखा हुआ

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    उसने कहा  कुछ लिख के भेजो ज़रा, मेरे शब्दों में जैसे हलचल मच गयी लड़ते लुढ़कते मुझ तक पहुंचे हैं कुछ सजते ही पेश कर दूंगा मैं भी, जैसे उस साडी…

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  • मेरी ज़िन्दगी

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    मेरी ज़िन्दगी का हालउस ज़मीन जैसा हैजो है तो बहुत बड़ी,जिस पर है नज़र हर किसी की,पर नहीं है उसकामालिक कोईइसलिये,अब वहाँ फूल नहींबस, झाड़-झंखाड़उगते हैं। -प्रशान्त

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  • फ़िर आयेंगे

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    मर तो जायें हम उनके जाने से पर,कह गये हैं वो कि हम फिर आयेंगे। जा चुके थे जो बादल बारिशों के बाद,साथ उनके सर्दियों में वो फ़िर आयेंगे। किताबों…

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  • वो तो मेरा माज़ी था

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    हाँ ये सच है कि उस वक़्त मैं राज़ी थापर जो बीत गया,वो तो मेरा माज़ी था फ़ीके ही सही मेरी क़लम के अशआर हैं येजो छूट गया गहरा स्याही…

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  • मेरी बाहों में

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    यूँ कुनमुनाओ मेरी बाहों मेंये रात गुनगुनी हो जाये झटक दो बालों से बरसातकुछ गुदगुदी हो जाये कोई सुन न ले किस्सा मेराकानों में बुदबुदी हो जाये बंद कर लो…

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  • सच्ची कोशिशों का ईनाम ख़ुदा ज़रूर देता है

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    सिजदे में झुके सर रोज़े की नमाजों में मालिक देता है रहमत इंसानियत के जहाजो में मेरे जज़्बे पर मेरे मालिक की नज़र है मेरे झुके सिर को वो एहतेराम…

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  • फिर भी, प्रेमी न थे!

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    मिल सको तो मिलोजैसे पहली बार मिले थे तुमथोड़े से मासूमथोड़े से नाज़ुकथोड़े से अल्हड़थोड़े से ‘तुम’ सब सुन्दर था तबउस बड़े घर की तरहजिसके अंदर कोई गया नहींहर कोना…

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  • बुरा हूँ बहुत

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    बुरा हूँ बहुत बुरा पर न चाहा कभीलफ्ज़ बोले नहीं पर कतरा समाया सभीइसी आस में हमने बहाये न आँसूसाथ गंगा के बह न जाये जज़्बे सभी बात निकली थी…

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  • सुलगता सपना और नीली बत्ती

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    लखनऊ शहर में क़रीब डेढ़ दशक पूर्व “राष्ट्रीय सहारा” नाम का समाचार पत्र अत्यंत लोकप्रिय था। वो समय था जब ‘सहारा’ अपने पूरे उफान पर था। तब उसे आज की…

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  • कुछ पता नहीं

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    माँ वाली शर्ट की उधड़ी सिलनजब सिली थी तुमने पहली बारना समझ आया थातुम पास आयी थी यामाँ हुयी थी दूरमैंने आज फिर वही शर्ट पहनी हैमाँ आज भी नाराज़…

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