कुछ लिखा हुआ

– अशान्त ·

– Ashant ·

· in

उसने कहा 
कुछ लिख के भेजो ज़रा,
मेरे शब्दों में जैसे हलचल मच गयी
लड़ते लुढ़कते मुझ तक पहुंचे हैं कुछ
सजते ही पेश कर दूंगा मैं भी,
जैसे उस साडी वाले ने
उस दिन खुद पर
पल्ला डाल कर दिखाया था तुम्हें

वो ज़री और कढ़ाई आज भी सजी है

तुम्हारी अलमारी में,
मेरी सादी सी कविता भी
अच्छी हो या बुरी,
रख लेना तुम अपने पास 
खूब संभाल कर,
अलमारी में नहीं
तो दिल में ही सही!
– प्रशान्त

– अशान्त

– Ashant

अशान्त की चिट्ठी

Letters from Small City Thinker. New writing, straight to your inbox.

Comments

Leave a Reply