कविताएँ

कविताएँ और ग़ज़लें। Poems and ghazals in Hindi.

  • दो अधूरे लोग

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    मैं सब कुछ लिख दूँगीतुम सब कुछ पढ़ लोगे,मैं सब कुछ कह दूँगीतुम सब कुछ सुन लोगे,दो अधूरे लोगों में फिरबचा क्या रह जायेगा? क्यों कहते नहीं तुम कुछलिखते क्यों…

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  • रद्दी

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    बहुत दिनों बाद आज आँधी आयी थी-  चेहरे पर, आँखों के कोरों में, बालों में, खिसखिसाते दाँतों  में, धूल जम गयी है; पर  सबसे बुरा ये हुआ  सालों की सहेजी…

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  • जब तुम मिल जाती हो

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    तुम नसीम सी हो मन महक जाता है  जब तुम मिल जाती हो।  तुम दुआ सी हो  बला टल जाती है  जब तुम मिल जाती हो।  तुम धागे सी होभावों…

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  • मैं तुमसे क्या मांग सकता हूँ?

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    मैं तुमसे क्या मांग सकता हूँ?क्या माँगना स्वाभिमान है?एक मध्य-वर्गीय शोषित हूँ मैंमेरी हड्डियाँ नहीं गली हैंमेरे पीठ-पेट नहीं हैं एकमेरा कमरा किताबों सेफ़ोन कई छूटी कालों सेघर आशावान घरवालों…

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  • तीन डंठलों वाला पौधा

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    तुम्हारे दिये पौधे में  बस तीन डंठलें बची हैं,  सब दिखता है  शीशे के गमले के आर-पार  इसलिये उस में नहीं जमा होने दी  कभी कोई गन्दगी; दावा तो नहीं…

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  • मासूम

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    मुख़ालफ़त हमसे करते इश्क़ तो मासूम था सज़ा ज़ुबाँ को देते दिल तो बेचारा मासूम था तुम्हारे तग़ाफ़ुल से मर गया जो जीते जी कह दो तुम ही वो शख़्स…

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  • जीवन एक विडंबना है

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    जीवन एक विडम्बना है-सफ़ेद सुन्दर है शांत है बाहरबूढ़ा है,बदसूरत है बाल पर;लाल क्रान्ति है प्रेम हैशरीर से निकले तो हिंसा है;काला सोखता है सब प्रकाशअदालत में काले की ही…

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  • दुःस्वप्न

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    मुँह में दाँत नहीं हैंरोटी भाग रही हैछत उड़ रही हैनींव डूब गयी हैबैंक पैसे निगल रहा हैआलस प्रखर हैशब्द खो गये हैंहँसी सो गयी हैरूंदन जग रहा हैस्मृतियाँ आतातायी…

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  • अनजान शहर

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    उस अनजान शहर की अनजान गली में बीच के एक घर में जो न मेरा था न उसका बंद था सब, सिवाय उस खिड़की के जिस से छन कर धीमी…

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  • आठ गुना आठ

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    आठ गुना आठ का कमरा, कोने में रखी मेज़ जिस पर फैली है सालों की मेहनत जिसका न तो कोई रंग है न कोई आकार और न ही कोई अस्तित्व;…

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