पुरानी धूल सनी किताब में
सूखा हुआ फूल पाया है
जो आज भी महकता है
बगीचे में खिले फूल जैसा
महक उन यादों की
जो आज तक जिन्दा है
दुबकी हुई दिल के किसी कोने में
कमज़ोर हो वक़्त के थपेड़ों से
फिर खुल गए आज
कई पुराने किस्से
किसी ने जैसे रख दी हो
गर्म नर्म हथेली
तेज़ धड़कते दिल पर
आज फिर पार्क में
सूखे पत्ते और खाली बेंच है
जिस पर पहले से अलग
मैं अकेला बैठा हूँ
अशांत

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