अपने सिरहाने तुम ज़रा देखो तो
कोई ख्वाब छुपा रखा होगा
वो सब सवाल जो तेरे में हैं
उन सब का जवाब रखा होगा।
यूँ तुम्हारे इस जहाँ में
हमारी मुलाकातों का कोई ज़िक्र नहीं
पर यकीं है की ख़्वाबों की उस जहाँ में
अपनी हर मुलाकात का हिसाब रखा होगा।
मेरी याद में जो बाहें है आँसू तेरे
‘उनका’ तेरे चहरे पर कोई निशाँ नहीं
पर ज़रा गौर से देख दिल को अपने
दुनिया से छुपा ‘उनका’ निशाँ रखा होगा।
अपने सिरहाने तुम ज़रा देखो तो
और कुछ वहाँ हो न हो
मेरी पहली छुवन की सिहरन
का यादगार कोई ज़रूर रखा होगा।
अशांत

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