काली घुंघराली जुल्फों से
होठों का तिल छुपाओ न
इतनी दूरी आज क्यूँ है
मेरे पास आओ ना।
तेरी मदहोश आंखों को
आज तो पी लेने दे
किसी साकी को आज
मोहब्बत के बीच लाओ न।
आज हर अदा बेपर्दा कर दो
तकल्लुफ की चादर गिराओ न
तेरी हया पर हयात कुर्बान है
दो दिलों के बीच इसे आज लाओ न।
तेरी मासूमियत भी लाजवाब है
मुझे एक पल में तेरा महकूम बनाती है
यकीं है सच्चा इश्क है तुझे मुझसे
इसे जताने को अपनी आंखों में आंसू लाओ न।
ख़ुद को हम दोनों ने
एक दूजे के नाम किया
प्यार की राहों में ख़ुद को गुमनाम किया
यूँ तो तुम हमेशा के लिए मेरी हो
पर हम दोनों की हसरतें अंजाम चाहती हें
इसलिए ऐ जान मेरी बाहों में आओ न।
अशांत

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