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महल की खिड़की
· कविताएँविकास एवं प्रगति सदैव प्रसन्नता का स्त्रोत हों,यह आवश्यक नहीं है। इस कविता में सोने की खिड़की पर बैठी चिड़िया के माध्यम से भौतिक रूप से सम्पूर्ण मनुष्य की आत्मिक अभिलाषा…
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इश्क़ इलाहाबादी
· लेखबाज़ारों की इस दुनिया में जब डूबी दुनिया आधी है, जहाँ कहीं पर प्रेम कभी वादी तो कभी प्रतिवादी है, उत्तर में भारत के बसती अलग कुछ आबादी है, ज़रा…
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दोहे प्रेम के
· कविताएँमैं प्रेम के लिये किसी भी एक दिवस निर्धारण वाले विचार से सहमत नहीं हूँ। लेकिन बाज़ार की रवायत का कुछ असर मुझ पर भी पड़ना लाजिमी है। और इसी क्रम…
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"ऋचांकित" तुम्हारा प्यार!
· कविताएँअपने प्रिय मित्र अंकित के विवाह के अवसर पर ये कविता लिखी है। प्रेम जैसे पूर्ण भाव को शब्दों में तो व्यक्त नहीं किया जा सकता, किन्तु अपनी भावनाओं की अभिव्यक्ति का…
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A random thought on Capital Punishment
My legal writing now has its own home at legalanalysis.in. This piece stays here as part of the archive. For newer legal analysis, please visit legalanalysis.in. Capital punishment is an…