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फाल्गुनी दोपहर
· कविताएँफाल्गुन की एक दोपहर वो भी थीजब तुम मेरे पास थी,चमकता चेहराआँखों तक मुस्कान,तुमने पहनी थीहमारे प्यार की लाल चूड़ियाँऔर कुछ भी नहीं;आज तुम नहीं हो, औरचाहे जो भी हो…
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ढूँढ़ता रहा
· कविताएँवो नूर मेरी आँखों में ही थाजिसे मैं हर सू ढूंढ़ता रहा उल्फ़त मेरी कभी ख़त्म न हुयीये अलग बात दिल टूटता रहा जब तक मिला न ख़ुदा मुझेमैं हर…
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हमें वो प्यार ही आता है
· कविताएँइतना जो तुम चाहोगीमैं कितना छुप पाऊँगाआना तो चाहता हूँन जाने कब आऊँगातुम दूर से इतना क्योंयूँ मुझको सताती होकहती हो सब आँखों सेलब से न बताती होबात इतनी सी…
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सपने वाला प्रेम
· कविताएँउमड़ आयी जो कल सपने मे मेरे वो तुम ही थी, या मेरा कोई अधूरा सपना जो इस संसार में रास्ता न पाकर नींद के चोर दरवाज़े से पहुंची मुझ…
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किसी और को
· कविताएँइश्तिहार-ए-इश्क़ में नाम मेरा ही थाये और है उसने खरीदा किसी और को मैं बस जिस्म था दिल नहीं उसके लियेबेपर्दा मुझे किया उसने पाने किसी और को इतना भी नहीं…
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अर्थ बदल जाते हैं
· कविताएँअर्थ बदल जाते हैंबदलती हैं भावनायें भीजो पावन था कभीहो जाता है पतित;तुम्हारे एक झूठ औरबनावटी चरित्र ने,एक ज़िंदा पेड़ मेँसुलगता चूना दाल दिया। -प्रशान्त
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हो इश्क़ भला तो ऐसा हो
· कविताएँजो तड़प के आख़िर टूट ही जायेहो इश्क़ भला क्यों ऐसा होजो अपनी आग ही सह न पायेहो इश्क़ भला क्यों ऐसा होसाथ कदम जो चल न पायेहो इश्क़ भला…
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मुझे अम्बेडकर देख रहे हैं
· कविताएँमुझे अम्बेडकर देख रहे हैं आजअपनी उन्हीं आँखों सेपढ़-पढ़ कर जिनसे लिखा था उन्होंने संविधानक्यों मुस्कुराते हैं वो मुझ पर?मेरी असफलता, मेरी कमीया प्रेम पर मेरा आश्रय देख कर? मैंने…