हो इश्क़ भला तो ऐसा हो

– अशान्त ·

– Ashant ·

· in

जो तड़प के आख़िर टूट ही जाये
हो इश्क़ भला क्यों ऐसा हो
जो अपनी आग ही सह न पाये
हो इश्क़ भला क्यों ऐसा हो
साथ कदम जो चल न पाये
हो इश्क़ भला क्यों ऐसा हो

भवरों में भी जो डूब न पाये
हो इश्क़ भला तो ऐसा हो
तासीर कभी न बुझने पाये
हो इश्क़ भला तो ऐसा हो
जीने मरने में जो बंध न पाये
हो इश्क़ भला तो ऐसा हो

–प्रशान्त

– अशान्त

– Ashant

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