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कटते रहोगे तुम
· कविताएँजब अपने ही बदल जायें तो क्या कर लोगे तुमचलने लगेगी जब ज़मीन कितना ठहर लोगे तुम रिश्ते, इश्क़,दोस्ती, सब जज़्बा-ए-दिल हैंदिल ही बदल जायें तो क्या कर लोगे तुम कम थे…
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असमय मृत्यु
· कविताएँमेरा जो कुछ भी मुझ में थाहो गयी उसकीआज असमय मृत्यु। ये उसी दिन तय हो गया थाजब पहली बार मैंनेकुछ अलग करने को सोचा था। मेरे सपने बन गये…
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पैरों के निशान
· कविताएँपड़ते नहीं अब कहीं मेरे पैरों के निशानमेरी रूह मुझसे कब की जुदा हो चुकी है जो जलती थी मुझ में मैं चलता था जिस सेवो हसरत भी मुझसे विदा…
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क्यों इतने दूर हो मुझसे
· कविताएँक्यों इतने दूर हो मुझसेमेरे स्वप्नकि, तुम तककोई सीढ़ी पहुँच नहीं पाती?मैं चाहूँ जोडूँ जितनी भी कड़ियाँतुम तक मेरी पहुँचक्यों बन नहीं पाती? इतनी ऊँचाई का भीबताओ क्या फायदाकि, तुम…
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सावन क्यों इतना सुंदर है
· कविताएँसावन क्यों इतना सुंदर हैक्यों सोया प्रेम जगाता हैजो सांसें कब की टूट चुकीक्यों उनमें प्राण जगाता है? लहराते पेड़ों पर इठलाती डालीझूम रही है बदरा काली-कालीजो बातें कब की…