किस्मत

– अशान्त ·

– Ashant ·

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ऐ हवा तू हर दम घुली हुयी है उनकी साँसों में
काश! मेरी साँसों की किस्मत तुझ सी होती

ऐ अब्र तेरा क्या तू जब चाहे बरस पड़ा
काश! मेरी आँखों की किस्मत तुझ सी होती

ऐ क़लम तू क्यों छूती है उनकी उंगलियाँ
काश! मेरे हाथों की किस्मत तुझ सी होती

ऐ मौसिक़ी तेरा तार्रुफ़ है उनकी आवाज़ से
काश! मेरे नाम की किस्मत तुझ सी होती

ऐ आँचल तू ढल जाता है उनकी ज़ानो पर
काश! मेरे सिर की किस्मत तुझ सी होती

ऐ महफ़िल तुझमें वो हो जाते हैं शरीक़
काश! मेरी शाम की किस्मत तुझ सी होती

ऐ पत्थर तुझे कम से कम मिलती हैं ठोकरें
काश! मेरे दिल की किस्मत तुझ सी होती

– अशान्त

– अशान्त

– Ashant

अशान्त की चिट्ठी

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