कविता

  • बड़प्पन

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    जो बैठे हैं शिखरों परनहीं सबके पाँव में छाले हैं,ऊपर चमक रही है कायापर अन्दर दिल बड़े काले हैं। हर सफल नहीं है समग्र पूज्यसब नहीं सच्चे साधन वाले हैं,“मैं”…

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  • प्रेम निवेदन

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    एक निवेदन तुमसे हैकरना तुम स्वीकार प्रिये,प्रेम रत्न से सदैव तुमकरना अपना श्रृंगार प्रिये। यह जीवन का सूर्य प्रखरशीतल हो तुम छाँव प्रिये,मैं पृथ्वी सा घूमूँ नित्यधुरी तुम मेरा तुम…

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  • प्रेमी मन

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    ये मौन प्रेम की प्रखर कल्पनानहीं यथार्थ में सुखदायी,प्रेम फलता है स्निग्ध स्नेह सेनहीं इसने आदर्शों की सत्ता चाही। नैतिकता बसती है स्वत्व मेंहै उसमें भी सहज अहं भाव,प्रेम निर्झर…

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  • दबे हुये बीज

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    हर एक मनुष्य किसान हैवो बोता है कई बीजइनकी आशा में-लहलहाती फ़सल,फल लदे पेड़,सुंदर फूलों के गुच्छे,और कुछ नहीं तोसुकून देने वाला हरापन। आशा असीमित नशा हैक्षितिज पर पहुँच कर…

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  • धनक-पुल

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    क्षितिज के दो छोरों परदो प्रेमी खड़े हैंएक शायद तुम होएक शायद मैं हूँ,इन दो छोरों के बीचधनक ने बनाया है पुल-हम दोनों को पता है न तुम आओगी इस…

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  • खोया शहर

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    इन्सान बदलें तो चलता हैक्यों बदल जाते हैं शहर? बदला हुआ शहर बदल देता हैउन यादों कोजिन्हें उड़ाया था धुँए में हमनेनाचने को उसी आबो हवा मेंजिसमें मैं पैदा हुआऔर…

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  • निराकार

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    जब प्रेम हमारा निश्छल था  फिर क्यों न वो साकार हुआ, न रूंदन था न क्रंदन था  फिर भी न कुछ आकार हुआ।  निज तप में तप कर हम दो …

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  • किस्मत

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    ऐ हवा तू हर दम घुली हुयी है उनकी साँसों में काश! मेरी साँसों की किस्मत तुझ सी होती ऐ अब्र तेरा क्या तू जब चाहे बरस पड़ाकाश! मेरी आँखों…

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