कल्पना

– अशान्त ·

– Ashant ·

· in

जब कागज़ पर बनी लंबी घासों के पीछे
आपको गाँव न दिखायी दे,
जब हर अलंकार का अर्थ ढूँढ़ा जाए
शब्दकोषो में,
जब प्रेम सिमट जाये आराम से
अर्थ-काम के कोनों में,
समझ लीजियेगा डरने लगे हैं
आप अपनी ही कल्पना से;

अभिव्यक्ति स्वतंत्र होती है
सघन जीवन-अरण्य में,
वाटिकाओं में तो बस
छद्म-श्रृंगार पुष्प खिलाये जाते हैं!

– प्रशान्त

– अशान्त

– Ashant

अशान्त की चिट्ठी

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