बेकार आदमी

– अशान्त ·

– Ashant ·

· in

वो आगे नहीं बढ़ सकता
क्योंकि उसे दोहराना नहीं आता!
अक्षम्य है वो मनुष्य
जिसने घिसे पिटे सिद्धान्तों की
पुनरावृत्ति नहीं की,
क्योंकि किसी भी परीक्षा में
वो प्रथम नहीं आ सकता।

पंक्ति में खड़ा आखिरी आदमी
होता है
स्टोर रूम में पीछे रखी हुयी एक चीज़
जो महत्वपूर्ण है,
पर रहती है अँधेरे में
डूबी हुयी सीलन में
साल में एक बार दीवाली पर
झाड़-पोंछ कर उसे
फिर डाल दिया जाता है पीछे
सड़ने के लिये।

क्यों नहीं फेंक देते उसे?
बाहर उसे कोई साँस तो मिले
या फिर
कोई जला ही डाले
और ख़त्म हो किस्सा
उसके अस्तित्व का,
क्योंकि उसका होना न होना
मायने नहीं रखता
उस व्यवस्था में,
जहाँ पर दोहराये बिना
कुछ नहीं मिलता।

क्या करे वो?
जो जानता है सोचना
बनाना कुछ नया
पर दोहरा नहीं पाता उसको,
लोग कहते हैं
बचपन में नीति-विज्ञान
उसका पसंदीदा विषय था!

– प्रशान्त

– अशान्त

– Ashant

अशान्त की चिट्ठी

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